बायोमटेरियल: फ़ैशन से कंस्ट्र्क्शन तक सस्टेनेबल क्रांति
इटली कई अलग-अलग क्षेत्रों में अगली पीढ़ी के पदार्थों पर सक्रियता से प्रयोग कर रहा है

अगली पीढ़ी के मटेरियल्स और दुनिया पर उनका असर
फ़ैशन से लेकर कंस्ट्रक्शन और डिज़ाइन से लेकर दवाओं तक, हर तरह के मटेरियल्स में इको-फ़्रेंडली क्रांति का बढ़ता प्रभाव दिखाई दे रहा है। Boston Consulting Group और Fashion for Good द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार, फ़ैशन सेक्टर में बेचे जाने वाले कुल माल की लागत में से मटेरियल्स का हिस्सा सिर्फ़ 30% होता है, लेकिन कुल प्रदूषण का 90% हिस्सा उन्हें निकालने, प्रोसेस करने और उनका उत्पादन करने की वजह से होता है। उन्नत बायोटेक्नोलॉजी या बायो-आधारित कच्चे माल का इस्तेमाल करके तैयार किए जाने वाले अगली पीढ़ी के मटेरियल्स, अच्छी परफ़ॉर्मेंस का वादा तो करते ही हैं, साथ ही पर्यावरण पर उनका दुष्प्रभाव भी कम होता है। अनुमान है कि साल 2030 तक, ग्लोबल फ़ाइबर मार्केट के 8% हिस्से पर इनका कब्ज़ा होगा—यानी लगभग 13 मिलियन टन—जो आज के मुकाबले 1% ज़्यादा है।
इटली भी इस तरह के मटेरियल्स पर प्रयोग कर रहा है, ताकि दुनिया भर में इटली का प्रतिनिधित्व करने वाले क्षेत्रों और उत्पादों में और भी ज़्यादा इनोवेशन किया जा सके।
फ़ैशन के क्षेत्र में इटैलियन इनोवेशन
इटली में, बायोमटेरियल्स पर किया जा रहा शोध ठोस और रचनात्मक नतीजे दे रहा है। कैम्पेनिया में स्थित लैबोरेटरी, Biologic ने ScobySkin विकसित किया है, जो बैक्टीरिया नामक सूक्ष्म जीवों द्वारा स्थानीय फलों, जैसे कि सेब, कीवी, संतरे और अंगूर के अपशिष्ट से बनाया गया एक बायोफ़ैब्रिकेटेड मटेरियल है। इससे हासिल होने वाली थ्री-डायमेंशनल बायोफ़िल्म फ़ैशन, डिज़ाइन और बायोमेडिकल इस्तेमाल के लिए अनुकूल, इको-फ़्रेंडली और उपयुक्त है। इटली के नेपल्स में स्थित Teatro San Carlo के कॉस्ट्यूम्स और जूलरी में इसका पहले से ही इस्तेमाल किया जा रहा है, जो दिखाता है कि शोध और परंपरा के संगम से किस तरह इनोवेटिव और बेहतर गुणवत्ता के उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं।

लैब में तैयार किया गया लेदर और औद्योगिक अनुप्रयोग
इटली का लेदर सेक्टर भी उन्नत टेक्नोलॉजी अपनाने के मामले में पीछे नहीं है। लैब में तैयार किए गए लेदर से बेहतर गुणवत्ता और पर्यावरण पर कम-से-कम असर डालने वाले मटेरियल्स हासिल करना मुमकिन है: इससे कार्बन के एमिशन में 87% तक की कमी आ सकती है, मीथेन का एमिशन पूरी तरह खत्म हो सकता है और जल व भूमि संसाधनों के इस्तेमाल में ज़बरदस्त गिरावट आती है। इन तकनीकों को—फ़ैशन से लेकर फ़ुटवेयर और फ़र्नीचर से लेकर ऑटोमोटिव उद्योग—जैसे कई अलग-अलग क्षेत्रों में आज़माया जा रहा है, जो इको-फ़्रेंडली इनोवेशन की प्रयोगशाला के तौर पर इटली की भूमिका की पुष्टि करता है।

इटैलियन कंस्ट्रक्शन और हेल्थकेयर के क्षेत्र में बायोमटेरियल्स
इनोवेशन का दायरा इटली के अन्य अहम क्षेत्रों में भी फैला हुआ है। कंस्ट्रक्शन के क्षेत्र में, नई बायो-आधारित तकनीकों की बदौलत, अब प्रवालों के जैवखनिजीकरण से प्रेरणा लेकर ऐसी प्रक्रियाओं के ज़रिए सीमेंट बनाना संभव है, जो पर्यावरण पर कम असर डालती हैं और जलीय सूक्ष्म कवकों का इस्तेमाल करके CO₂ का अवशोषण भी करती हैं। हेल्थकेयर के क्षेत्र में, इटैलियन लैबोरेटरीज़ 3D बायोप्रिंटिंग और स्मार्ट पॉलिमर बायोमटेरियल्स का इस्तेमाल करके ऐसे ऐप्लिकेशन विकसित करती हैं, जिनका इस्तेमाल टिश्यू इंजीनियरिंग, रीजेनेरेटिव मेडिसिन और टार्गेटेड ड्रग डिलीवरी के लिए किया जा जाता है, जिससे ज़रूरत के अनुसार तैयार किए गए और इको-फ़्रेंडली समाधान मिलते हैं।
इटली के लिए अवसर और दृष्टिकोण
इटली में बायोमटेरियल्स को बड़े पैमाने पर अपनाने की वजह से अगले पाँच सालों के दौरान बेचे जाने वाले माल की लागत में 4% तक की कमी आ सकती है, जिससे आपूर्ति शृंखलाओं को ज़्यादा सशक्त और ज़्यादा प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकता है। लेकिन असली फ़ायदा तो शोध और इनोवेशन को ठोस नतीजों में बदलने की इटली की क्षमता में छिपा हुआ है, जिससे काम करने के तरीके, डिज़ाइन और सस्टेनेबिल्टी को बेहतर बनाया जा सकता है। परिधान से लेकर कंस्ट्रक्शन तक के क्षेत्रों में चल रहे ठोस स्थानीय प्रोजेक्ट्स की बदौलत, इटली बायो-आधारित मटेरियल्स की उन्नत लैबोरेटरी के रूप में अपनी छवि मज़बूत कर रहा है और दुनिया भर में चल रही इको-फ़्रेंडली क्रांति के लीडर के तौर पर अपनी भूमिका को सशक्त बना रहा है।
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