इटली और जियोथर्मल ऊर्जा : ऐतिहासिक जड़ों वाला उत्कृष्टता का केंद्र
साल 1904 में, टस्कनी में दुनिया के पहले जियोथर्मल पावर प्लांट का उद्घाटन हुआ, जिसने बिजली के उत्पादन के क्षेत्र में क्रांति ला दी।

जहाँ ऊर्जा का जन्म होता है
जियोथर्मल ऊर्जा, यानी भूमिगत ताप का दोहन करके बिजली बनाने की क्षमता की जड़ें इटली से जुड़ी हुई हैं। साल 1904 में टस्कनी के लार्डेरेलो में दुनिया में पहली बार प्राकृतिक भाप का इस्तेमाल करके बिजली बनाई गई थी। इस प्रयोग के ज़रिए स्टीम वेंट का इस्तेमाल करके कुछ लाइट बल्बों को रोशन किया गया था और यहीं से इस अनोखी औद्योगिक कहानी की शुरुआत हुई। कुछ सालों बाद साल 1913 में, पहले कार्यशील जियोथर्मल पावर प्लांट का निर्माण लार्डेरेलो में किया गया, जो एक ऐसी महत्त्वपूर्ण उपलब्धि थी, जिसे आज भी दुनिया भर में सराहा जाता है।
इटली, दुनिया का तीसरा बड़ा उत्पादक
इस घटना को एक सदी से भी ज़्यादा समय बीत चुका है, लेकिन इटली आज भी इस क्षेत्र के अग्रणी खिलाड़ियों में से एक है। संयुक्त राज्य अमेरिका और फ़िलिपींस के बाद, इटली जियोथर्मल ऊर्जा का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। इटली के पावर प्लांट मुख्य रूप से टस्कनी में केंद्रित हैं, जो जियोथर्मल ऊर्जा के मोर्चे पर सबसे सक्रिय और तकनीकी रूप से सबसे उन्नत क्षेत्र है। यहाँ क्षेत्रीय माँगों को पूरा करने में उच्च और मध्यम ताप वाली जियोथर्मल ऊर्जा का हिस्सा काफ़ी ज़्यादा है, जो दर्शाता है कि यह संसाधन किस तरह बिजली के इको-फ़्रेंडली समाधान अपनाने की दिशा में लगातार, विश्वसनीय योगदान कर सकता है।
एक विशिष्ट संसाधन से बदलाव लाने वाली बड़ी ताकत तक
जियोथर्मल ऊर्जा का नया अध्याय शुरू हो चुका है : भले ही यह तकनीक लंबे समय से हमारे बीच है, लेकिन आज माना जा रहा है कि अक्षय ऊर्जा के मामले में यह विकास की सबसे ज़्यादा संभावना रखती है। इटली के टस्कनी में 34 प्लांट्स के साथ, जियोथर्मल ऊर्जा की यह मात्रा देश में होने वाले कुल उत्पादन के सिर्फ़ 2% हिस्से को दर्शाती है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह बिजली की माँग के सिर्फ़ 0.8% हिस्से को पूरा करती है। एक ओर जहाँ इन आँकड़ों से पता चलता है कि जियोथर्मल ऊर्जा का किस तरह अभी भी पूरी तरह से दोहन नहीं हुआ है, वहीं नए तकनीकी समाधान इसकी भूमिका को नए सिरे से लिखने के लिए तैयार हैं।
उदाहरण के लिए, अनुमान है कि साल 2050 तक उन्नत क्लोज़्ड-लूप वाले जियोथर्मल सिस्टम, लागत को 30–50 USD/MWh तक कम करके, जियोथर्मल ऊर्जा को अन्य अक्षय ऊर्जा समाधानों की बराबरी पर ले आएँगे। यह कोई संयोग नहीं है कि PNIEC (इंटिग्रेटेड नेशनल एनर्जी एंड क्लाइमेट प्लान) ने साल 2030 तक 1 GW की अतिरिक्त उत्पादन क्षमता वाला संयंत्र शुरू करने का लक्ष्य रखा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देखने से पता चलता है कि इस सदी के मध्य तक, दुनिया भर में होने वाले बिजली उत्पादन में जियोथर्मल ऊर्जा का हिस्सा 15% होगा। तकनीकी इनोवेशन, जलवायु से जुड़े लक्ष्यों और अपनी विशिष्ट स्थिति से आगे बढ़कर अब बदलाव में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए तैयार नए ऐप्लिकेशन के इसी मिश्रण ने आज जियोथर्मल ऊर्जा को सबसे तेज़ी से विकसित होने वाला इको-फ़्रेंडली विकल्प बना दिया है।
टस्कनी, उत्कृष्टता की प्रयोगशाला
टस्कनी मुख्य भूमिका निभाता है। इटली की जियोथर्मल ऊर्जा का लगभग कुल उत्पादन करने वाले इस क्षेत्र ने एक एकीकृत मॉडल विकसित किया है, जिसमें जियोथर्मल ऊर्जा का इस्तेमाल सिर्फ़ बिजली का उत्पादन करने तक सीमित नहीं है। भूमिगत ऊष्मा का इस्तेमाल शहरी इलाके को हीटिंग की सुविधा देने, एग्रीकल्चरल ग्रीनहाउस और औद्योगिक संयंत्रों को गर्म रखने और यहाँ तक कि मशहूर प्राकृतिक स्पा के ज़रिए पर्यटन के क्षेत्र में भी किया जाता है। इस बहु-विषयक दृष्टिकोण ने टस्कनी को यूरोपीय केस स्टडी की एक आदर्श मिसाल बना दिया है, जहाँ पर्यावरण की सस्टेनेबिलिटी और स्थानीय विकास का एक सुंदर मेल देखने को मिलता है।

Made-in-Italy इनोवेशन और रिसर्च
हमें वैज्ञानिक और तकनीकी रिसर्च की भूमिका को अनदेखा नहीं करना चाहिए। सालों तक शोध करने के बाद, इटली ने प्लांट डिज़ाइन, वेल ड्रिलिंग और सिस्टम मैनेजमेंट का उन्नत ज्ञान विकसित किया है। INGV (द नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ जियोफ़िज़िक्स एंड वोल्केनोलॉजी) जैसे निकाय, संस्थानों और व्यवसायों के साथ मिलकर जियोथर्मल परिघटना पर नज़र रखते हैं, पर्यावरण पर उसके प्रभाव का अध्ययन करते हैं और निष्कर्षण की तकनीकों को बेहतर बनाते हैं। विशेषज्ञता का यह भंडार निर्यात की जा सकने वाली एक ऐसी संपदा है, जो अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में भी इटली की स्थिति को सशक्त बना सकती है।
भविष्य पर नज़र
आज के दौर में इको-फ़्रेंडली विकल्पों का ज़ोर है और इसलिए एक बार फिर से यह बहस छिड़ गई है कि जियोथर्मल ऊर्जा एक मुख्य संसाधन का रूप ले सकती है या नहीं। अपनी ऐतिहासिक उत्कृष्टता और संगठित ज्ञान की बदौलत, आज इटली के पास अपनी इसी भूमिका को और भी ज़्यादा मज़बूत बनाने का मौका है। इस क्षेत्र में किए जाने वाले निवेश से सिर्फ़ देश ही ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर नहीं बनता, बल्कि औद्योगिक इतिहास, वैज्ञानिक इनोवेशन और सस्टेनेबिलिटी के संकल्प को एकजुट करने वाली परंपरा को भी आगे बढ़ाने का मौका मिलता है। यह एक ऐसा संयोजन है, जो इटली की जियोथर्मल ऊर्जा को सिर्फ़ अतीत का उदाहरण नहीं, बल्कि यूरोप की ऊर्जा के भविष्य का स्तंभ बना सकता है।
सूत्र:
Regione Toscana. “जियोथर्मल ऊर्जा क्या है और यह कैसे काम करती है”। Regione Toscana, 26 मई, 2025.
INGVambiente. “जियोथर्मल ऊर्जा का जन्म”। INGVambiente, मंगलवार, 2 सितंबर, 2025.