नदियों से समंदर तक: इटैलियन इनोवेशन ने महासागरों की तस्वीर बदल दी
समंदर में मौजूद 80% प्लास्टिक नदियों से आता है, इसलिए महासागर को बचाने के काम में जुटे फ़्लोरेंस के एक स्टार्ट-अप ने अब अपना ध्यान इनलैंड वॉटर पर देना शुरू किया है

समंदर में फैलने वाला प्रदूषण समुद्र तट पर शुरू नहीं होता: यह नदियों, शहरों, प्रोडक्शन सिस्टम और रोज़मर्रा की उन गतिविधियों से शुरू होता है, जिनके आधार पर यह तय होता है कि आखिर कितना प्लास्टिक खुले समंदर में जाएगा। इसी वजह से, इटली में कुछ लोगों ने इनलैंड वॉटर पर ध्यान देने का फ़ैसला किया है। समंदर को सुरक्षित रखने के लिए, ज़रूरी है कि समस्या की जड़ को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की जाए: इसी जानकारी के आधार पर फ़्लोरेंस में एक स्टार्ट-अप का जन्म हुआ, जिसने टेक्नोलॉजी और AI को एक साथ कचरे की निगरानी और रिकवरी की प्रक्रियाओं में इस्तेमाल करना शुरू किया।
नदियाँ ज़रूरी क्यों हैं: समंदर में मौजूद 80% प्लास्टिक मैदानी इलाकों से आता है
ज़रूरी नहीं कि समंदर की सफ़ाई की शुरुआत महासागर के केंद्र से हो। इस चुनौती का एक अहम हिस्सा इनलैंड वॉटर से जुड़ा है, जो ऐसे चैनल बन सकते हैं जो कचरे को समंदर तक ले जाएँ।
आर्थिक सहयोग और विकास संगठन द्वारा 2025 में प्रकाशित अध्ययन “Stemming plastic pollution to protect the ocean” के मुताबिक, 2020 में नदियों से 1.4 टन कचरा समंदर में गया। यही आँकड़ा 2060 तक 3.6 मिलियन टन तक पहुँचने की आशंका है।
इसलिए, वॉटर बेसिन पर कार्रवाई करने का मतलब है, प्लास्टिक के समंदर तक पहुँचने से पहले ही उसे रोक देना, जिससे रिकवरी आसानी से और शहर में कचरा इकट्ठा करने के लिए बनाए गए सिस्टम के पास हो सकती है। महासागर को सुरक्षित रखना स्थानीय स्तर पर मौजूद बुनियादी ढाँचे पर भी निर्भर करता है, जिसमें स्थानीय क्षेत्रों में पर्यावरण की निगरानी और स्थानीय क्षेत्र में कचरे का प्रबंधन समंदर में रह रहे जीवों को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं।
महासागरों की सफ़ाई के लिए इटैलियन इनोवेशन: AI और ऑटोमेटेड रिवर बैरियर
इसी जानकारी के आधार पर फ़्लोरेंस में एक स्टार्ट-अप का जन्म हुआ, जो महासागर की सफ़ाई में अपने इनोवेशन के लिए जाना जाता है। intoscana की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कंपनी ने नदी में मौजूद कचरे को समंदर में जाने से पहले रोकने के लिए एक सिस्टम तैयार किया है।
यह सिस्टम नदी में लगाया जाता है और यह तैरते हुए कचरे को रोकने के लिए, एक तैरते हुए बैरियर का इस्तेमाल करता है। फिर चीज़ों को एक किनारे पर ले जाया जाता है, उन्हें कन्वेयर बेल्ट के ज़रिए निकाला जाता है और एक अनलोडेबल कंटेनर में जमा किया जाता है, जो कि इंडस्ट्रियल कचरे के डिब्बे जैसा होता है।
नदी के कचरे के प्रबंधन का यह तरीका कुछ हद तक शहर में कचरे के प्रबंधन में इस्तेमाल होने वाली आम प्रक्रिया जैसा ही है। दूसरे शब्दों में कहें, तो यह टेक्नोलॉजी सिर्फ़ प्लास्टिक इकट्ठा नहीं करती, बल्कि उसे एक ऐसी प्रक्रिया में शामिल करती है, जो स्थानीय समुदायों के लिए ज़्यादा व्यवस्थित, निगरानी और प्रबंधन योग्य हो।

इस टेक्नोलॉजी के काम करने का तरीका: निगरानी से लेकर कचरे की रिकवरी तक
Made in Italy वाले इस सिस्टम में, फ़िज़िकल रिकवरी और डिजिटल मॉनिटरिंग दोनों का इस्तेमाल होता है। तैरते हुए बैरियर और कन्वेयर बेल्ट के साथ, इसमें कंप्यूटर विज़नपर आधारित एक एनालिसिस टूल का इस्तेमाल भी होता है, जो अपने-आप तैरते हुए कचरे की पहचान करके उसे अलग-अलग वर्गों में बाँट देता है।
डेटा इकट्ठा करने का काम हाई-रिज़ॉल्यूशन कैमरों की मदद से किया जाता है, जो तस्वीरें रिकॉर्ड करके उन्हें क्लाउड सर्वर पर भेजते हैं। वहाँ, एक प्रशिक्षित न्यूरल नेटवर्क कॉन्टेंट का विश्लेषण करता है और पता करता है कि क्या प्लास्टिक है और क्या जैविक पदार्थ है।
इसलिए, इस पूरी प्रक्रिया में डेटा की भूमिका अहम हो जाती है। यह जानकारी ज़रूरी है कि नदियों से कितना कचरा समंदर में जाता है, वह कहाँ और कितनी बार जमा होता है। इसकी मदद से, ज़्यादा सटीक सिस्टम तैयार किया जा सकता है। स्टार्ट-अप, क्लीनटेक SME और पर्यावरण हितधारकों के लिए, यह तरीका दिखाता है कि किस तरह से आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके पर्यावरण को सुरक्षित रखा जा सकता है। यह स्थानीय स्तर पर अपनाए जा रहे प्रबंधन के तरीके को बदलने के बजाय उसे मज़बूत बनाता है।
महासागरों में प्लास्टिक की गंभीर समस्या: आँकड़े
समंदर को सुरक्षित रखने के मुद्दे पर चर्चा करते समय महासागरों में प्लास्टिक की समस्या सबसे ज़रूरी मुद्दों में से एक है। PlasticsEurope द्वारा किए गए अध्ययन “Plastics the Fast Facts 2025” में बताया गया है कि दुनिया भर में प्लास्टिक का उत्पादन तेज़ी से बढ़ा है: 2014 में 311 मिलियन टन से बढ़कर यह 2024 में 430 मिलियन टन से भी ज़्यादा हो गया है।
इन बढ़ते आँकड़ों उत्पादन प्रक्रियाओं और इस्तेमाल हो रहे कच्चे माल पर चिंतन करने की ज़रूरत है। महासागरों में, पहले से ही कचरे से बने द्वीप मौजूद हैं, जिन्हें पानी की धार ने समंदर में ले जाकर इकट्ठा कर दिया है। वहीं, दुनिया के अन्य कई हिस्सों में समुदायों का अस्तित्व तक खतरे में है।
वास्तव में, तीन अरब लोग अपनी आजीविका के लिए समंदर पर आश्रित हैं, जैसा कि OECD के अध्ययन “The Ocean Economy to 2050” में बताया गया है। वहीं, McKinsey के सहयोग से वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम द्वारा किए गए एक अध्ययन के मुताबिक समंदर से साल 2020 में 2.6 ट्रिलियन डॉलर की कमाई हुई, जो साल 2050 तक 5.1 ट्रिलियनतक बढ़ने की उम्मीद है।
ये आँकड़े बताते हैं कि महासागरों की सफ़ाई को सिर्फ़ एक आपदा के बाद की रिकवरी के तौर पर क्यों नहीं देखा जा सकता। एक व्यापक रणनीति की ज़रूरत है, जो रोकथाम, संग्रह, पर्यावरण शिक्षा, ट्रैकिंग टेक्नोलॉजी और सार्वजनिक व निजी सेक्टर्स के बीच सहयोग को साथ लेकर चलने में सक्षम हो।
विश्व महासागर दिवस: शुरुआत और उद्देश्य
मानवता और समंदर के बीच संबंधों की अहमियत के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लक्ष्य के साथ, विश्व महासागर दिवस की शुरुआत 1992 में रियो डी जनेरियो अर्थ समिट के दौरान की गई थी। इसके बाद, संयुक्त राष्ट्र ने 2009 में इसे आधिकारिक रूप से मान्यता दी और इसका जश्न हर साल 8 जून को मनाया जाता है।
इसका उद्देश्य नागरिकों, संस्थानों और व्यवसायों के बीच समंदर के इकोसिस्टम की अहमियत और उनकी सुरक्षा की ज़रूरत के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। यह दिन सिर्फ़ नाम भर के लिए नहीं है: यह कंज़ंप्शन मॉडल, कचरे के प्रबंधन, जैव विविधता संरक्षण और ऐसी टेक्नोलॉजी पर विचार करने का अवसर जिसमें इंसानी हस्तक्षेप कम हो।
क्लीनटेक SME और स्टार्ट-अप की दुनिया के लिए, यह अवसर सस्टेनेबिलिटी को इनोवेशन के क्षेत्र के रूप में देखने का एक अहम मौका भी है। महासागरों को बचाने का मतलब है, उत्पादन प्रक्रियाओं में हस्तक्षेप करना, पर्यावरण के प्रति जागरूकता को व्यावहारिक समाधानों में बदलना।

महासागर को सुरक्षित रखने का भविष्य: इटली का योगदान
महासागर को सुरक्षित रखने के लिए जागरूकता, टेक्नोलॉजी और प्रबंधन सुविधाओं को एक साथ लाने की ज़रूरत होती है। फ़्लोरेंस के इस स्टार्ट-अप के भविष्य के लक्ष्यों में सिस्टम का ऑप्टिमाइज़ेशन, सीरियल प्रोडक्शन और नदी के कचरे का लगातार अध्ययन करने के लिए एक स्थायी राष्ट्रीय निगरानी नेटवर्क का निर्माण शामिल है।
यह परिदृश्य उन लोगों के लिए उपयोगी है, जो
इटली के स्ट्रैटेजिक सेक्टर्स, क्योंकि यह दिखाता है कि सस्टेनेबिलिटी, डेटा और पर्यावरण संबंधी टेक्नोलॉजी एक साथ किस तरह से लंबे समय के समाधानों में उपयोगी हो सकती हैं। विश्व महासागर दिवस हमें याद दिलाता है कि समंदर की सुरक्षा किसी आने वाली समस्या से जुड़ा मुद्दा नहीं है: यह बिज़नेस, स्थानीय इलाकों, शहरों और सप्लाई चेन से संबंधित है।
इटली ऐसे इनोवेशन लाकर अपना योगदान दे सकता है, जो कचरे के फैलने से पहले ही उसे रोकने में सक्षम हों और जो महासागर की सफ़ाई को रोकथाम, निगरानी और कचरे के प्रबंधन में बदल दें। यह समंदर को सुरक्षित रखने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो सस्टेनेबिलिटी पर ज़ोर देने वाली इंडस्ट्रियल और तकनीकी विशेषज्ञता को भी बढ़ावा देता है।
OpportunItaly महासागरों को सुरक्षित रखने में इटैलियन इनोवेशन को बढ़ावा देता है
हर साल 8 जून को मनाए जाने वाले विश्व महासागर दिवस का उद्देश्य है कि महासागरों को प्लास्टिक सहित अन्य बड़े खतरों से सुरक्षित रखने की ज़रूरत पर ध्यान दिया जाए। आज पेशेवरों को अपने अनुभव और जानकारी के साथ-साथ नई टेक्नोलॉजी और आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस से और फ़ायदा मिल रहा है, जिससे पर्यावरण को सुरक्षित रखने में बेहतर तरीके अपनाए जा सकते हैं।
OpportunItaly इटैलियन कंपनियों, अंतरराष्ट्रीय हितधारकों और सस्टेनेबिलिटी से जुड़े स्ट्रैटेजिक सेक्टर्स के बीच संवाद को बढ़ावा देकर इस तरह की विशेषज्ञता को आगे बढ़ाता है। क्लीनटेक SME और स्टार्ट-अप के लिए, महासागर को सुरक्षित रखना न सिर्फ़ एक पर्यावरणीय चुनौती है: यह वैश्विक बाज़ारों में विकास, सहयोग और प्रगति का क्षेत्र भी है। OpportunItaly के साथ अपने बिज़नेस को तेज़ी से बढ़ाने का तरीका जानने के लिए, प्रोग्राम में शामिल हों।
सूत्र:
Plastics the Fast Facts 2025
OECD – The Ocean Economy to 2050
Stemming plastic pollution to protect the ocean
वर्ल्ड इकोनॉमिक फ़ोरम, McKinsey
intoscana
संक्षेप में
विश्व महासागर दिवस हर साल 8 जून को मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 1992 में रियो डी जनेरियो अर्थ समिट में हुई थी और संयुक्त राष्ट्र ने 2009 में इसे आधिकारिक रूप से मान्यता दी थी।
महासागर को सुरक्षित रखने की शुरुआत नदियों से होती है। OECD के अध्ययन “Stemming plastic pollution to protect the ocean” के मुताबिक, 2020 में नदियों से 1.4 टन कचरा समंदर मेंगया। यही आँकड़ा 2060 तक 3.6 मिलियन टन तक पहुँचनेकी आशंका है।
इटैलियन इनोवेशन रोकथाम पर फ़ोकस करता है। intoscana की रिपोर्ट के मुताबिक, फ़्लोरेंस के एक स्टार्ट-अप ने तैरने वाले बैरियर, कन्वेयर बेल्ट और कलेक्शन सिस्टम का इस्तेमाल करके नदी में मौजूद कचरे को समंदर में जाने से पहले रोकने के लिए एक सिस्टम तैयार किया है।
डिजिटल निगरानी से सिस्टम ज़्यादा सटीक बनते हैं। यह सिस्टम प्लास्टिक और जैविक पदार्थ के बीच अंतर करने के लिए हाई-रिज़ॉल्यूशन कैमरों, एक क्लाउड सर्वर और एक प्रशिक्षित न्यूरल नेटवर्क का एक साथ इस्तेमाल करता है, जिससे डेटा एक पर्यावरण प्रबंधन टूल में बदल जाता है।
दुनिया भर में प्लास्टिक का उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। PlasticsEurope के “Plastics the Fast Facts 2025” में बताया गया है कि दुनिया भर में उत्पादन 2014 में 311 मिलियन टन से बढ़कर 2024 में 430 मिलियन टन से भी ज़्यादा हो गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल